
सम्पूर्ण भारतीय साहित्य में जो दलित विमर्श तथा आंदोलन फिलहाल चल रहे हैं,उसके जड़ें इस पुस्तक पाठक को खोजने पर मिल जाएगी। इस पुस्तक के पीछे मुखयतः दो तरह कि प्रेरणाएं रही हैं। उसमे एक तो प्रटूट विषय कि प्रासंगिकता है तो दूसरी कृति केन्द्रित मूल्यांकनपरक समीक्षा ग्रन्थों का अभाव है। दलित साहित्य पर पुस्तकें कई हैं,पर कृतीयों के समग्र मूल्यांकन कि कमी कभी-कभी महसूस होती है। इसी परिप्रेक्ष्य में यह पुस्तक लिखी गयी है।
Page Count:
200
Publication Date:
2016-01-01
Publisher:
Vani Prakashan
ISBN-10:
9350728370
ISBN-13:
9789350728376
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