
As an Amazon Associate and affiliate partner, Menrva Books earns from qualifying purchases. Learn more
"भाषा का प्रयोग तो सभी लोग करते हैं, किन्तु वही भाषा सुन्दर मानी जाती है जो व्याकरण-सम्मत एवं सरल-सुबोध् हो। अतः दीर्घ समय से प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए व्याकरण की एक ऐसी पुस्तक की आवश्यकता अनुभव की गई जो सरल, सुबोध् एवं सरस होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हो। अतएव वर्तमान युग की आवश्यकताओं एवं बच्चों की रफचि तथा योग्यता के स्तर को देखते हुए हमने ‘नवीन हिंदी व्यावहारिक व्याकरण तथा रचना’ भाग 1-8 नामक पुस्तक शंृखला का पूर्ण रूप से परिमार्जन एवं संशोध्न किया है, जो नई शिक्षा नीति 2020 तथा विभिन्न राज्यों के शिक्षा-बोर्डों के नवीनतम पाठ्यव्रफम पर आधरित है। इस पुस्तक- शृंखला के साथ हैं नवीन हिंदी व्यावहारिक व्याकरण तथा रचना, भाग (1 - 8) अध्यापक-पुस्तिका, भाग (1 - 8) प्रस्तुत पुस्तक शंृखला की विशेषताएँ इस प्रकार हैं- - व्याकरण के व्यावहारिक ज्ञान पर विशेष बल दिया गया है और इसके लिए हमने अपने आस-पास के वातावरण में उपलब्ध् वस्तुओं, प्राणियों तथा उनके व्रिफयाकलापों को सरल भाषा में उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करके इसके प्रत्येक पाठ को सहज बोध्गम्य बना दिया है। - भाषा, व्याकरण, वर्णमाला, शब्द, उसके भेद एवं शब्द-भंडार आदि सभी पाठ बच्चों की आवश्यकता, योग्यता एवं उनकी ग्रहण-क्षमता के अनुसार सुनियोजित तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। - इसमें रचनात्मक एवं प्रयोजनमूलक, सभी शिक्षण-सामग्री का उचित समावेश किया गया है, जैसे- कहानी-लेखन, पत्रा-लेखन, अनुच्छेद तथा निबंध्-लेखन, चित्रा-वर्णन, सूचना एवं विज्ञापन-लेखन आदि। - दैनंदिन जीवन से संबद्ध् रोचक उदाहरणों का सचित्रा प्रस्तुतीकरण भाषा-ज्ञान को सरल एवं सुग्राह्य बनाता है तथा ‘रटने’ के स्थान पर स्वतः समझने को प्रोत्साहन मिलता है। - हिंदीभाषी क्षेत्रों के साथ-साथ अहिंदीभाषी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी प्रस्तुत शंृखला भाषा-ज्ञान का उत्तरोत्तर विकास करने में सर्वाध्कि सक्षम है। - अभ्यास-कार्य के अंतर्गत बच्चों को विविध् प्रकार के प्रश्न हल करने के लिए दिए गए हैं। इससे आगे की कक्षाओं एवं प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उन्हें सुविध होगी। ऑनलाइन सहायता की प्रमुख विशेषताएँ - संपूर्ण व्याकरण का सुग्राह्य तथा मनोरंजक ए
Page Count:
119
Publication Date:
2023-05-16
Publisher:
Goyal Brothers Prakashan
ISBN-10:
939494690X
ISBN-13:
9789394946903
No comments yet. Be the first to share your thoughts!