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मेंने अपने इस काव्य संग्रह में दिल को छूने वाली खट्टी-मीठी यादें को समेट हुए प्रकृति मैं रची-बसी सामाजिक सरोकार से परिपूर्ण कविताए लिख है जैसे:- “ढूंढते रह जाओगे” नेक जिंदगानीं, मौजों में रवानी; दूध में पानीं, गरीबी में जवानी| “आगया बसंत” वर्षा, घन-मेघ गए, गए शिशिर हेमंत; पीली-पीली सरसों फूली, मटर और केसर फूली| “उजड़ा-उजड़ा पनघट है” बदल गए हैं शहर-शिवाले, बदल गया हर गांव है; उजड़ा-उजड़ा पनघट है, और सहमी-सहमी शाम है| “नेनौं की भाषा” सबसे पहले उससे नज़र मिली; मैं मूस्काया वो मूस्काई, मानो जैसे कली खिली...|| मुझे पूर्ण विश्वास है कि हर पाठक गण को यह काव्य संग्रह पसंद आएगा और उन्हें जिंदगी में सुखद एहसास महसूस होगा, एसा मुझे विश्वास है|
Page Count:
66
Publication Date:
2017-11-15
Publisher:
Notion Press
ISBN-10:
1948032791
ISBN-13:
9781948032797
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