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'कुछ सोचा कुछ कहा' वस्तुतः कुछ विचारो की अभिव्यक्ति हैं, जो चलते फिरते, उठते बैठते एक आम महानगरीय जीवन में किसी भी व्यक्ति के दिलो दिमाग में आते जाते रहते हैं / कोई विशेष साहित्यिक विधा से इतर ये कवितायेँ सिर्फ दिलो दिमाग में आते जाते खयालो का एक लेखा जोखा हैं / इनके विचार और विधा सबकुछ अनियोजित और अविरल हैं, फिर भी संभवतः पढ़ने वालो के ये कविताये मौलिक विचारो की एक ताज़गी भरी सुगंध दे सकेंगे / इसी आशा के साथ - प्रस्तुत हैं - 'कुछ सोचा कुछ कहा'
Page Count:
44
Publication Date:
2025-08-12
Publisher:
Bookleaf Publishing
ISBN-10:
9370924477
ISBN-13:
9789370924475
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