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यह एक ऐसे महापुरुष की संघर्ष-कथा है, जो कठिनाइयों में भी आत्मा से निर्देशित होते रहे। वह इंग्लैंड में पढ़े। आई.सी.एस. की परीक्षा पास की, पर देश-भक्ति के जुनून में पद ठुकरा दिया। भारत लौटकर बड़ौदा शासन के ऊंचे वेतन को छोड़कर राष्ट्रीय कॉलेज में थोड़े वेतन पर प्राचार्य हो गए । 'वन्दे मातरम' कलकत्ता से निकाला, जो क्रांतिकारियों और देश-भक्तों के लिए प्रेरणा स्रोत बना। जिसके कारण अंग्रेज सरकार उन्हें जेल भेजने के लिए जी-जान से जुट गई। श्री अरविन्दो स्वयं क्रांतिकारी थे, विचार से पूर्ण कर्मयोगी थे। वह जीने की अदृश्य दिशाएं खोलने का आवाहन करते हैं - आओ, मुझे जानो! तमस से बाहर आकर सूर्य से चमको!! यह तीर्थ-यात्रा है, महर्षि अरविन्दो के जीवन की पूर्व-कथा की, उत्तर- कथा के लिए पढ़िए, दूसरा भाग 'अंतर्यात्रा' ।
Page Count:
352
Publication Date:
2023-03-03
Publisher:
Diamond Pocket Books Pvt Limited
ISBN-10:
935684593X
ISBN-13:
9789356845930
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