
अतीत के गौरव से वर्तमान पुलकित होता है । भूतकाल के काल खंड के पदचाप - उत्कर्ष या अपकर्ष- वर्तमान को उसके अनुसार ध्वनित करते हैं । हमारा अतीत स्वर्णिम था । इसी कारण वह विश्वगुरू के पद पर सुशोभित हुआ था । ऋषियों ने भारत भूमि को 'माता' शब्द से पुशोभित कर उसकी वंदना की है । यहाँ उन्होंने आत्मज्ञान एवं ब्रह्म साक्षात्कार किया है । वसुधैव कुटुम्बकं की सुखद कल्पना एवं उसके क्रियाकलापों का उदय भारतभूमि से हुआ है । भारत एक विराट शक्ति संपन्न राष्ट्र है । वह अनंत शक्ति रूपणी भवानी 'माँ' है । भारत भूमि से प्रवाहित जीवन धारा, जीवन कलाओं को अनुप्राणित करती है । वह मानव को दैवत्त्व की ओर ले जाने में सक्षम है । महर्षि अरविंद ने कहा है कि भारत हमारी मातृभूमि है । यह जमीन का टुकड़ा नहीं है और न मन की कपोल कल्पना है । यह लाखों करोड़ों लोगों की शक्ति के समुच्चय से बना विराट राष्ट्र है । राष्ट्र में एकात्मता, ममता एवं समता पैदा करने के लिए विचार पक्ष और क्रियापक्ष समाहित जन जागरण के कार्यक्रम की महती आवश्यकता है । वे जीवन के बाह्य एवं आंतरिक जीवन दर्शन को आध्यात्मिक एवं भौतिक उन्नति के प्रेरणात्मक उत्प्रेरक क्रियाकलापों को मूर्तरूप देते है, जिससे जीवन की पुष्प वाटिका की महक अनुप्राणित होती है ।
Page Count:
128
Publication Date:
2024-04-15
Publisher:
Booksclinic Publishing
ISBN-10:
9358231580
ISBN-13:
9789358231588
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